Shopping cart

Subtotal: $4398.00

View cart Checkout

Magazines cover a wide subjects, including not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

देश विदेश

ईरान-इज़राइल युद्ध का असर: एल्युमिनियम 4 साल के उच्च स्तर पर, कॉपर समेत अन्य मेटल्स में गिरावट

Blog Image
906

नई दिल्ली।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-इज़राइल युद्ध के कारण वैश्विक मेटल बाजार में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सप्लाई में संभावित रुकावट की आशंका के चलते एल्युमिनियम की कीमत लगभग चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। वहीं जोखिम लेने की क्षमता घटने से कॉपर और अन्य इंडस्ट्रियल मेटल्स में गिरावट दर्ज की गई है।

लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर एल्युमिनियम का भाव 1.6% बढ़कर 3,499.50 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया, जो अप्रैल 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। पिछले सप्ताह एल्युमिनियम की कीमतों में लगभग 10% की तेजी आई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि फारस की खाड़ी से शिपमेंट में संभावित रुकावट की आशंका के कारण कीमतों में यह उछाल देखने को मिला है। यह क्षेत्र वैश्विक एल्युमिनियम सप्लाई का करीब 9% हिस्सा उपलब्ध कराता है।

सप्लाई बाधित होने का खतरा

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के बाद कतर और बहरीन के दो बड़े स्मेल्टर्स को डिलीवरी रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके चलते अमेरिका में मेटल खरीदने वाले कई खरीदार अब एशिया से वैकल्पिक शिपमेंट लेने की कोशिश कर रहे हैं।

युद्ध के कारण ऊर्जा सप्लाई और उत्पादन पर असर की आशंका भी बढ़ गई है। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल आया है और तेल के दाम में लगभग 20% की तेजी दर्ज की गई है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

विशेषज्ञों की राय

यदि यह युद्ध लंबे समय तक चलता है तो एल्युमिनियम की वैश्विक सप्लाई पर और दबाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि कई निवेशक तेजी से एल्युमिनियम खरीद रहे हैं, जबकि अन्य इंडस्ट्रियल मेटल्स में अपनी पोजीशन कम कर रहे हैं।

अन्य मेटल्स में गिरावट

मेटल बाजार के अन्य प्रमुख धातुओं में गिरावट देखी गई।

  • कॉपर 1.8% गिरकर 12,637 डॉलर प्रति टन पर आ गया।

  • निकेल 3.1% टूटकर 16,920 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया।

वहीं शंघाई बाजार में सुबह 9:40 बजे तक एल्युमिनियम 0.7% बढ़कर 3,467.50 डॉलर प्रति टन पर कारोबार करता दिखा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, तब तक मेटल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के कारण एल्युमिनियम की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post