नई दिल्ली।
दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार को हुई झमाझम बारिश और तेज हवाओं के बाद वायु प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हुई इस बारिश ने राजधानी की हवा को काफी हद तक साफ कर दिया है। करीब 103 दिनों के बाद दिल्लीवासियों को साफ हवा में सांस लेने का मौका मिला है।
बारिश से पहले दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ था। लेकिन शनिवार सुबह AQI में गिरावट दर्ज की गई और यह 242 से 256 के बीच रहा, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं दोपहर बाद औसत AQI घटकर 192 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में शामिल है।
CPCB के आंकड़ों में सुधार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ‘समीर’ ऐप के अनुसार, शनिवार सुबह दिल्ली का औसत AQI शुक्रवार के 293 की तुलना में घटकर 256 दर्ज किया गया। राजधानी के 29 निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता ‘खराब’ श्रेणी में रही, जबकि चार स्टेशनों पर यह ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई।
रिपोर्ट तैयार किए जाने तक तीन स्टेशनों के आंकड़े उपलब्ध नहीं थे। इनमें द्वारका क्षेत्र में सबसे कम AQI 113 दर्ज किया गया, जो अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति को दर्शाता है।
AQI श्रेणियां क्या कहती हैं
CPCB के अनुसार:
-
0–50 : अच्छा
-
51–100 : संतोषजनक
-
101–200 : मध्यम
-
201–300 : खराब
-
301–400 : बेहद खराब
-
401–500 : गंभीर
बारिश और हवाओं के कारण प्रदूषणकारी कण वातावरण से काफी हद तक साफ हुए, जिससे हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
आगे कैसा रहेगा हाल
वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के मुताबिक, अगले दो दिनों तक दिल्ली की हवा ‘खराब’ श्रेणी में बनी रह सकती है। इसके बाद आने वाले छह दिनों में वायु गुणवत्ता के ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रहने की संभावना जताई गई है।
मौसम का ताजा अपडेट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, दिल्ली में आने वाले दिनों में अधिकतम तापमान 17 से 19 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 6 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। न्यूनतम तापमान सामान्य के आसपास रहेगा, जबकि अधिकतम तापमान सामान्य से 1.3 से 3.3 डिग्री सेल्सियस कम रह सकता है।
लोगों को मिली राहत
बारिश के बाद साफ हुई हवा से लोगों ने राहत की सांस ली है। सुबह के समय दृश्यता बेहतर रही और स्मॉग का असर कम नजर आया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है और प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण के लिए ठोस उपाय जरूरी हैं।