पटना: लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने शनिवार को बिहार के 43वें राज्यपाल के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। पटना स्थित लोकभवन में आयोजित समारोह में पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू ने उन्हें शपथ दिलाई। उन्होंने पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान का स्थान लिया।
शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत राज्य सरकार के कई मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से जारी नियुक्ति पत्र पढ़कर सुनाया। सैयद अता हसनैन ने हिंदी में शपथ ग्रहण की।
सैन्य पृष्ठभूमि और अनुभव
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन भारतीय सेना में एक वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। वे श्रीनगर स्थित चिनार कोर के पूर्व कमांडिंग-इन-चीफ रहे हैं। सेना में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों में भाग लिया, जिनमें 1988-90 के दौरान श्रीलंका में ऑपरेशन पवन और 1990-91 में पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियान शामिल हैं।
शिक्षा और सामाजिक पहल में भूमिका
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी हसनैन सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। वे वर्ष 2018 में कश्मीर केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कश्मीर के युवाओं को शिक्षा, रोजगार और खेलों के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई सामाजिक कार्यक्रमों की शुरुआत की।
रणनीतिक सोच और सार्वजनिक जीवन
हसनैन को सिर्फ एक सैन्य अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक रणनीतिक विचारक और सुधारक के रूप में भी जाना जाता है। सेना से रिटायर होने के बाद उन्हें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) का सदस्य बनाया गया, जहां उन्होंने आपदा प्रबंधन, राष्ट्रीय सुरक्षा और युवाओं को रोजगार से जोड़ने से संबंधित कई महत्वपूर्ण पहलों में योगदान दिया।
बिहार के नए राज्यपाल के रूप में सैयद अता हसनैन के अनुभव और प्रशासनिक समझ से राज्य को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।