उज्जैन/इंदौर। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को मध्य प्रदेश को बड़ी सौगात देते हुए लगभग 2,935 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड 4-लेन कॉरिडोर का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहे। 48 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर प्रदेश के दो प्रमुख शहरों इंदौर और उज्जैन के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने के साथ आर्थिक और धार्मिक गतिविधियों को नई गति देगा।
भूमिपूजन समारोह इंदौर जिले के सांवेर क्षेत्र में आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि यह कॉरिडोर दोनों शहरों के बीच दूरी कम करेगा और क्षेत्रीय विकास को नई दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश में आधारभूत संरचना, जनकल्याण और गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं।
पीथमपुर और दिल्ली-मुंबई इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ेगा क्षेत्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर उज्जैन, सांवेर और इंदौर क्षेत्र के विकास का नया आधार बनेगा। उन्होंने बताया कि यह मार्ग पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र और निमाड़ क्षेत्र को भी दिल्ली-मुंबई इकोनॉमिक कॉरिडोर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कॉरिडोर इंदौर-पीथमपुर आर्थिक गलियारे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे तक पहुंच के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा, जिससे निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी सुविधा
अधिकारियों के अनुसार यह 48 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर इंदौर के पितृ पर्वत क्षेत्र से शुरू होकर उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर के समीप सिंहस्थ बायपास तक पहुंचेगा। इससे वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
सिंहस्थ तैयारियों की समीक्षा
उज्जैन प्रवास के दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिंहस्थ-2028 की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने लगभग 778 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे 29.15 किलोमीटर लंबे नए घाटों के निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
इसके साथ ही दोनों नेताओं ने कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना का निरीक्षण किया और निर्माण कार्यों की समीक्षा की। परियोजना के तहत कान्ह नदी के दूषित जल को शिप्रा नदी में जाने से रोका जाएगा तथा क्लोज डक्ट के माध्यम से लगभग 30 किलोमीटर दूर गंभीर बांध के डाउनस्ट्रीम में छोड़ा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 में आने वाले श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी का स्वच्छ और निर्मल जल उपलब्ध कराया जाए।
आवास और शहरी विकास परियोजनाओं को भी मिली गति
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत 2,548 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 42 हजार से अधिक आवासों का भूमिपूजन किया गया। वहीं 992 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 38 हजार से अधिक आवासों में लाभार्थियों का सांकेतिक गृह प्रवेश भी कराया गया।
इसके अलावा अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत 446 करोड़ रुपये की लागत वाली 116 परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 310 करोड़ रुपये की लागत वाली 37 परियोजनाओं का भूमिपूजन भी किया गया।
केंद्रीय मंत्री खट्टर ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मध्य प्रदेश को कुल 5,657 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है, जिससे आवास, स्वरोजगार और शहरी विकास से जुड़े कार्यों को गति मिल रही है।