New Delhi / Patna: चारा घोटाले में पहले ही सजा काट चुके राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की विशेष अदालत ने ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में लालू यादव के परिवार के छह सदस्यों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इस फैसले के बाद लालू परिवार का बड़ा हिस्सा अब आपराधिक मुकदमे का सामना करेगा।
कोर्ट ने लालू की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव, तथा उनकी दो बेटियां—लोकसभा सांसद मीसा भारती और हेमा यादव—के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
क्या है लैंड फॉर जॉब मामला?
सीबीआई के अनुसार, जब लालू यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे, तब ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन लिखवाई गई। इसी आरोप के आधार पर सीबीआई ने साल 2022 में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी।
किन धाराओं में आरोप तय?
विशेष अदालत ने लालू परिवार के सदस्यों पर आपराधिक साजिश (धारा 120बी), धोखाधड़ी (धारा 420) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) व 13(1)(डी) के तहत आरोप तय किए हैं। यदि ये आरोप साबित होते हैं तो संबंधित लोगों को जेल की सजा के साथ-साथ चुनाव लड़ने से भी अयोग्यता झेलनी पड़ सकती है।
कितने आरोपी ट्रायल का सामना करेंगे?
कोर्ट ने कुल 103 आरोपियों में से 52 को बरी कर दिया है, जबकि पांच आरोपियों की मौत हो चुकी है। अब लालू-राबड़ी परिवार के छह सदस्यों सहित कुल 46 आरोपी मुकदमे का सामना करेंगे।
RJD की राजनीति पर असर
इस समय RJD की कमान तेजस्वी यादव के हाथों में है। तेज प्रताप यादव पहले ही पार्टी से अलग होकर अपनी नई पार्टी बना चुके हैं। मीसा भारती लोकसभा सांसद हैं, राबड़ी देवी विधान परिषद की सदस्य हैं, जबकि हेमा यादव फिलहाल सक्रिय राजनीति में नहीं हैं। यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं तो इसका RJD की भविष्य की राजनीति और नेतृत्व पर बड़ा असर पड़ सकता है।