मुंबई। एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली और घरेलू कारकों के दबाव के चलते गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कमजोरी से उबरकर हरे निशान में पहुंचे, लेकिन बाद में बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख सूचकांक फिर लाल निशान में आ गए।
दोपहर करीब 12:20 बजे सेंसेक्स 439.62 अंक यानी 0.57 फीसदी की गिरावट के साथ 76,654.45 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 50 भी 137.65 अंक यानी 0.57 फीसदी टूटकर 23,965.25 के स्तर पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स अपने इंट्रा-डे हाई 77,194.83 से करीब 579 अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी 24,135.50 के उच्च स्तर से करीब 182 अंक टूटकर 23,953.60 तक आ गया।
आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली
बाजार पर सबसे अधिक दबाव आईटी और मेटल सेक्टर से देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मेटल इंडेक्स ढाई फीसदी से ज्यादा टूट गया। इसके अलावा पीएसयू बैंकिंग शेयरों में भी डेढ़ फीसदी से अधिक की कमजोरी रही। दूसरी ओर फार्मा सेक्टर में एक फीसदी से ज्यादा की बढ़त भी बाजार को संभाल नहीं सकी।
एशियाई बाजारों की कमजोरी का असर
वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी घरेलू बाजार पर दिखाई दिया। अमेरिकी बाजारों में पिछला कारोबारी सत्र कमजोर रहा, जहां नैस्डैक 1 फीसदी से अधिक गिरकर बंद हुआ। इसके बाद एशियाई बाजारों में भी बिकवाली हावी रही। जापान का निक्केई 225 करीब 3 फीसदी, हांगकांग का हैंग सेंग 2 फीसदी और चीन का शंघाई कंपोजिट लगभग डेढ़ फीसदी तक फिसल गया। अन्य प्रमुख एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई।
निफ्टी वीकली एक्सपायरी का भी पड़ा असर
विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी इंडेक्स डेरिवेटिव्स की साप्ताहिक एक्सपायरी के चलते भी बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा। एक्सपायरी डे पर ट्रेडर्स की पोजिशनिंग और मुनाफावसूली के कारण बाजार में अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक संकेतों, सेक्टोरल बिकवाली और एक्सपायरी से जुड़े दबावों के कारण फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।