जबलपुर (मध्य प्रदेश): बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ‘नर्मदा क्वीन’ नामक क्रूज के पलटने से अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 लोग अब भी लापता हैं। घटना के एक दिन बाद भी राहत और बचाव कार्य जारी है।
मौसम अलर्ट के बावजूद रवाना हुई क्रूज
बचे हुए यात्रियों के मुताबिक, मौसम विभाग ने पहले ही आंधी-तूफान का अलर्ट जारी कर दिया था। जबलपुर मौसम विभाग के अनुसार, 30 अप्रैल को 40–50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं और भारी बारिश का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया था। इसके बावजूद क्रूज को गुरुवार शाम करीब 6 बजे रवाना होने की अनुमति दी गई।
क्षमता से अधिक यात्रियों का आरोप
करीब 90 यात्रियों की क्षमता वाली इस क्रूज में घटना के समय 40 से अधिक लोग सवार थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 टिकट जारी होने की बात कही, लेकिन स्थानीय लोगों और बचावकर्मियों का दावा है कि आखिरी ट्रिप होने के कारण अतिरिक्त लोगों को भी सवार होने दिया गया।
लाइफ जैकेट नहीं, अफरा-तफरी में गई जानें
जीवित बचे यात्रियों ने आरोप लगाया कि क्रूज पर चढ़ते समय किसी को भी लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई। जब हालात बिगड़े और पानी भरने लगा, तब जैकेट बांटने की कोशिश की गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई। कई यात्री जैकेट तक नहीं पहुंच पाए और डूब गए।
‘क्रू और पायलट कूद गए’—यात्रियों का आरोप
कई प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि क्रूज के पलटने से पहले ही पायलट और क्रू सदस्य कूदकर अपनी जान बचा गए, जबकि यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया। हालांकि, क्रूज पायलट महेश पटेल ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि हादसे के दौरान हालात इतने तेजी से बिगड़े कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।
अचानक बदला मौसम, उठीं ऊंची लहरें
घटना के समय क्रूज पर सवार वकील रोशन आनंद वर्मा ने बताया कि शुरुआत में मौसम सामान्य था, लेकिन बीच डैम में पहुंचते ही तेज हवाओं और ऊंची लहरों ने स्थिति बिगाड़ दी। क्रूज में पानी भरने लगा और वह अनियंत्रित होकर घूमने लगी, जिसके बाद कुछ ही मिनटों में पलट गई।
स्थानीय लोगों ने शुरू किया बचाव
घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद स्थानीय लोगों ने बचाव कार्य शुरू किया और कई लोगों की जान बचाई। एसडीआरएफ की टीम रात करीब 8 बजे मौके पर पहुंची और अंधेरे के बावजूद राहत कार्य जारी रखा। गैस कटर की मदद से क्रूज के हिस्सों को काटकर शवों को बाहर निकाला गया।
मेंटेनेंस पर भी उठे सवाल
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ‘नर्मदा क्वीन’ का आखिरी मेंटेनेंस अक्टूबर में किया गया था और इसे पूरी तरह सुरक्षित बताया गया था। हालांकि, हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और संचालन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।