सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बसंत पंचमी के दिन भोजशाला परिसर में पूजा के साथ-साथ नमाज की अनुमति दी है। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, हिंदू श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा-अर्चना कर सकेंगे, जबकि मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज अदा करने की इजाजत होगी।
यह मामला धार जिले की विवादित भोजशाला से जुड़ा है, जिसे हिंदू पक्ष वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पूजा और नमाज दोनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।
प्रशासन को दिए गए निर्देश
सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया है कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या पहले से जिला प्रशासन को बताई जाए, ताकि सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। साथ ही कोर्ट ने प्रशासन को आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के भी सुझाव दिए हैं।
23 साल पुरानी व्यवस्था
गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी व्यवस्था के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार भोजशाला में पूजा करने और मुसलमानों को हर शुक्रवार नमाज पढ़ने की अनुमति है। यह व्यवस्था पिछले 23 वर्षों से लागू है। इस बार चुनौती इसलिए बढ़ गई, क्योंकि बसंत पंचमी शुक्रवार के दिन पड़ रही है।
पहले भी हो चुका है विवाद
वर्ष 2016 में भी बसंत पंचमी शुक्रवार को ही पड़ी थी। उस दौरान पूजा और नमाज के समय को लेकर विवाद हुआ था और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन व झड़पें देखने को मिली थीं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने पहले से ही भोजशाला परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को संतुलन साधने वाला माना जा रहा है, जिसमें दोनों समुदायों की धार्मिक आस्थाओं का ध्यान रखते हुए शांतिपूर्ण आयोजन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।