बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार, 16 जनवरी को पश्चिम चंपारण के बेतिया से ‘समृद्धि यात्रा’ की शुरुआत करते हुए ऐलान किया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर अब निजी प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही एक नई और सख्त नीति लागू करने जा रही है।
बड़े रमना मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों का पूरा समय और समर्पण सरकारी अस्पतालों और मरीजों की सेवा में होना चाहिए। निजी प्रैक्टिस पर रोक से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित होगी और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही में भी सुधार आएगा। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि आम जनता को सुलभ, बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
नीतीश कुमार ने बताया कि इसी उद्देश्य से बिहार के सभी जिला और प्रखंड स्तरीय अस्पतालों को चरणबद्ध तरीके से विशिष्ट चिकित्सा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को बड़े शहरों में जाने की मजबूरी नहीं रहेगी। जिला अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण, विशेषज्ञ डॉक्टर और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, हृदय रोग, कैंसर, किडनी और न्यूरोलॉजी जैसी प्रमुख सेवाओं को और मजबूत किया जाएगा।
सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने 2005 से पहले की सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय बिहार में कानून-व्यवस्था, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब थी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने बिहार को विकास की नई दिशा दी है और सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बेतिया जिले के लिए करीब 182 करोड़ रुपये की लागत से 161 विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री, मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।