छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में सोमवार को एक बड़ी सफलता सामने आई, जब कुल नौ नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर कुल 45 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें छह महिलाएं भी शामिल हैं।
पुलिस ने बताया कि ये सभी नक्सली माओवादी विचारधारा से निराश होकर और जंगल के कठिन जीवन से तंग आकर सामने आए हैं। साथ ही, छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति ने उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने तीन एके-47 और दो एसएलआर राइफलें भी सुरक्षा बलों को सौंपीं।
रायपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अमरेश मिश्रा ने जानकारी दी कि सरेंडर करने वाले नक्सली सिनापाली और एसडीके एरिया कमेटी के सक्रिय सदस्य थे। इनमें से कई लंबे समय से गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित थे। नक्सलियों ने बताया कि मीडिया और स्थानीय ग्रामीणों के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि आत्मसमर्पण करने वाले उनके पुराने साथी अब सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं, आवास और रोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर बेहतर जीवन जी रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में अंजू उर्फ कविता, बलदेव, दमरू और सोनी पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। वहीं, रंजीत उर्फ गोविंद पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा पार्वती उर्फ सुक्की करम पर पांच लाख रुपये और तीन अन्य सदस्यों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम था।
अधिकारियों ने बताया कि सुकमा जिले की निवासी अंजू वर्ष 2004 से प्रतिबंधित संगठन में सक्रिय थी और उसके खिलाफ गरियाबंद जिले में 19 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी तरह, बस्तर निवासी बलदेव भी 29 मामलों में वांछित था।
गौरतलब है कि इस वर्ष अब तक छत्तीसगढ़ में कुल 180 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इससे पहले 15 जनवरी को बीजापुर जिले में 52 नक्सलियों ने एक साथ हथियार डाले थे, जिनमें से 49 पर 1.41 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। यह घटनाक्रम राज्य में शांति और पुनर्वास की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।