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Indian Rupee: डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ रुपया, जानिए शुरुआती बढ़त की प्रमुख वजहें

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Indian Rupee Today: भारतीय रुपया आज शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। विदेशी मुद्रा बाजार में बेहतर वैश्विक संकेतों, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते रुपये को सपोर्ट मिला। इसके अलावा घरेलू शेयर बाजार में स्थिर शुरुआत ने भी रुपये की चाल को सहारा दिया।

फॉरेक्स मार्केट में शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। बाजार सहभागियों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की सीमित खरीदारी और एशियाई मुद्राओं में मजबूती ने भी रुपये की स्थिति को मजबूत किया।

डॉलर इंडेक्स में कमजोरी से मिला सहारा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा हुआ। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी और फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण डॉलर पर दबाव बना रहा। इसका सीधा असर रुपये पर भी पड़ा और इसमें शुरुआती मजबूती देखने को मिली।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

कच्चे तेल की कीमतों में आई हल्की गिरावट ने भी रुपये को सपोर्ट दिया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल के दाम घटने से आयात बिल कम होने की उम्मीद बनती है। इससे रुपये पर दबाव कम होता है और निवेशकों का भरोसा बढ़ता है।

घरेलू शेयर बाजार से मिला सपोर्ट

घरेलू शेयर बाजार में स्थिर से सकारात्मक शुरुआत का असर भी रुपये पर पड़ा। इक्विटी बाजार में गिरावट न होने से विदेशी निवेशकों की ओर से भारी डॉलर मांग नहीं दिखी, जिससे रुपये को मजबूती बनाए रखने में मदद मिली।

RBI की भूमिका पर नजर

मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि Reserve Bank of India रुपये की चाल पर करीबी नजर बनाए हुए है। अत्यधिक उतार-चढ़ाव की स्थिति में केंद्रीय बैंक की ओर से हस्तक्षेप की संभावना से भी बाजार को संतुलन मिलता है।

आगे की चाल पर क्या रहेगा असर?

विश्लेषकों के मुताबिक, आने वाले सत्रों में रुपये की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। अगर डॉलर इंडेक्स कमजोर बना रहता है और क्रूड की कीमतों में तेजी नहीं आती, तो रुपये में आगे भी सीमित मजबूती देखने को मिल सकती है। हालांकि, किसी भी नकारात्मक वैश्विक खबर से इसमें फिर दबाव आ सकता है।

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