इंदौर:
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैले डायरिया के गंभीर मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। अब तक इस प्रकोप में 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालात की भयावहता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे “डरावनी स्थिति” करार दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस वी.के. शुक्ला ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि शहर में इस घटना के बाद दहशत का माहौल बन गया है और कोई भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा। उन्होंने बताया कि इस मामले की खबर पढ़ने के बाद उन्होंने तुरंत हाईकोर्ट परिसर की पानी की टंकी की जांच करवाई और उसे साफ कराने के निर्देश दिए।
“पूरा शहर डर के माहौल में” – जस्टिस वी.के. शुक्ला
सुनवाई के दौरान जस्टिस शुक्ला ने कहा,
“इस केस के बारे में पढ़ने के बाद मेरा पहला सवाल यही था कि हाईकोर्ट की पानी की टंकी कौन साफ करता है। मैंने तुरंत कॉन्ट्रैक्टर को बुलाया, जांच करवाई और टंकी साफ करवाई। पूरे शहर में भय का माहौल है।”
उन्होंने माना कि इस घटना ने आम नागरिकों के साथ-साथ प्रशासनिक संस्थानों को भी सतर्क कर दिया है।
सरकार ने मानी 16 मौतों की पुष्टि
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से हाईकोर्ट की इंदौर बेंच को बताया गया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैले डायरिया के कारण अब तक 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राहुल सेठी ने कोर्ट को ‘डेथ ऑडिट रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए जानकारी दी कि कुल 23 संदिग्ध मौतों में से 16 मौतें स्पष्ट रूप से डायरिया के कारण हुई हैं, जबकि 6 मामलों में मौत का कारण अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
24 दिसंबर से शुरू हुआ था प्रकोप
सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथपुरा इलाके में डायरिया फैलने की शुरुआत 24 दिसंबर 2025 से हुई थी। तब से अब तक बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े हैं और कई को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ कर रही है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि स्थिति बेहद गंभीर है और इस पर तत्काल प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
प्रशासन को दिए सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि पीने के पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच की जाए, प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
फिलहाल प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं और पानी की टंकियों व पाइपलाइनों की सफाई का कार्य तेज कर दिया गया है।