पटना: बिहार में आरक्षण को लेकर एनडीए के भीतर चल रही बयानबाजी के बीच अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सांसद मीसा भारती ने भी मोर्चा खोल दिया है। पाटलिपुत्र से सांसद मीसा भारती ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए कहा कि आरक्षण पर बहस करने से पहले उन्हें अपनी आरक्षित सीटों से इस्तीफा देकर सामान्य सीट से चुनाव लड़ना चाहिए।
मीसा भारती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आरक्षण की समीक्षा को लेकर वही लोग बयान दे रहे हैं, जो खुद आरक्षित सीटों से चुनाव जीतकर संसद तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान लगातार आरक्षित सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं, जबकि जीतन राम मांझी के परिवार के सदस्य भी आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ चुके हैं।
उन्होंने कहा, "अगर इन लोगों को आरक्षण पर बहस करनी है तो पहले सुरक्षित सीट से इस्तीफा दें और सामान्य सीट से चुनाव लड़कर दिखाएं।"
'बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे एनडीए के सहयोगी'
मीसा भारती ने एनडीए के सहयोगी दलों पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और बिहार में सत्ता में शामिल सहयोगी दल वही बात कर रहे हैं, जो भारतीय जनता पार्टी कहती है। उनके मुताबिक, एनडीए के घटक दलों के पास अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत नहीं बची है।
उन्होंने नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU), उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी का नाम लेते हुए कहा कि ये नेता बिहार के छात्रों, बेरोजगारों और राज्य के अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर अपनी बात नहीं रखते।
मीसा भारती ने बिहार की डबल इंजन सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद राज्य में रोजगार और उद्योग के क्षेत्र में अपेक्षित काम नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि 21 वर्षों के कार्यकाल में सरकार बिहार में एक फैक्ट्री तक नहीं लगा सकी।
आरक्षण के 'सब-कोटा' पर आमने-सामने चिराग और मांझी
दरअसल, बिहार में आरक्षण व्यवस्था में सब-कोटा को लेकर एनडीए के भीतर मतभेद सामने आए हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी और उनके बेटे संतोष कुमार सुमन आरक्षण में सब-कोटा की व्यवस्था के पक्ष में हैं। वहीं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का कहना है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ दिनों से बयानबाजी तेज है। चिराग पासवान ने जीतन राम मांझी और संतोष सुमन को आरक्षण के मुद्दे पर बहस की चुनौती देते हुए इस्तीफा देने की बात कही थी।
तेजस्वी और रोहिणी के बाद मीसा ने संभाला मोर्चा
आरक्षण के मुद्दे पर लालू यादव के परिवार की ओर से भी लगातार बयान सामने आ रहे हैं। इससे पहले रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा था कि जब तक समाज में असमानता कायम है, तब तक आरक्षण की समीक्षा नहीं होनी चाहिए।
इसके बाद बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी आरक्षण के मुद्दे पर चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर निशाना साधा था। तेजस्वी ने आरोप लगाया था कि आरक्षण के पैरोकार होने का दावा करने वाले नेता उन ताकतों के साथ खड़े हैं, जो आरक्षण को खत्म करना चाहती हैं।
अब मीसा भारती के बयान के बाद बिहार की राजनीति में आरक्षण का मुद्दा और गरमा गया है। एनडीए के भीतर चिराग पासवान और मांझी के बीच जारी मतभेद के बीच आरजेडी नेताओं के लगातार हमलों ने इस विवाद को राजनीतिक रंग दे दिया है।