मुंबई:
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट—शरद पवार और दिवंगत अजित पवार के नेतृत्व वाले धड़े—जल्द ही एकजुट हो सकते हैं। स्थानीय निकाय चुनावों के बाद फरवरी के दूसरे सप्ताह में एनसीपी के औपचारिक विलय की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि अजित पवार ने अपने असमय निधन से पहले पार्टी के एकीकरण की जमीन तैयार कर दी थी। दिसंबर और जनवरी के दौरान उन्होंने अपने चाचा शरद पवार से कई बार मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की थी। दोनों नेताओं की योजना थी कि स्थानीय चुनावों के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी के विलय की घोषणा की जाए।
एनसीपी के वरिष्ठ नेता अंकुश काकड़े ने कहा कि अजित पवार अपने चाचा शरद पवार को जन्मदिन पर दोनों गुटों के विलय का तोहफा देना चाहते थे, लेकिन उस समय परिस्थितियां अनुकूल नहीं बन सकीं।
अगले सप्ताह अहम बैठक की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, दोनों गुटों के वरिष्ठ नेता अगले सप्ताह बैठक कर विलय की अंतिम रूपरेखा तय करेंगे। हालांकि, अजित पवार गुट के कुछ नेता तुरंत विलय के पक्ष में नहीं हैं और उनका मानना है कि इस मुद्दे को राजनीतिक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
वहीं, शरद पवार गुट इस प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करना चाहता है।
नेतृत्व को लेकर चार नामों की चर्चा
एनसीपी के संभावित एकीकरण के साथ सबसे बड़ा सवाल पार्टी के नेतृत्व को लेकर है। पार्टी के भीतर चार नामों को लेकर सबसे अधिक चर्चा हो रही है:
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शरद पवार – पार्टी के संस्थापक और सबसे वरिष्ठ नेता
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सुनेत्रा पवार – अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद
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सुप्रिया सुले – शरद पवार की बेटी और लोकसभा सांसद
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प्रफुल्ल पटेल – पूर्व केंद्रीय मंत्री और अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा समर्थन सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष और विधायक दल का नेता बनाए जाने को लेकर बताया जा रहा है। यदि किसी तकनीकी या राजनीतिक कारण से यह संभव नहीं हुआ, तो प्रफुल्ल पटेल को दूसरा मजबूत विकल्प माना जा रहा है।
एनसीपी विभाजन और फिर एकजुट होने की कहानी
गौरतलब है कि शरद पवार ने वर्ष 1999 में कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी की स्थापना की थी। जुलाई 2023 में अजित पवार ने पार्टी में बगावत कर भाजपा-शिवसेना की महायुति सरकार में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री पद संभाला था। उनके साथ प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल और दिलीप वालसे-पाटिल जैसे वरिष्ठ नेता भी गए थे।
अब अजित पवार के असामयिक निधन के बाद पार्टी के दोनों धड़े फिर से एक मंच पर आते नजर आ रहे हैं।
विमान हादसे में हुआ था अजित पवार का निधन
बुधवार (28 जनवरी) को बारामती एयरपोर्ट पर खराब मौसम के कारण दूसरी बार लैंडिंग की कोशिश के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से समीकरण बदलते दिख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि एनसीपी का यह विलय होता है तो यह महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है और आगामी चुनावी समीकरणों पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा।