आम आदमी पार्टी (AAP) को एक बड़े राजनीतिक झटके के बीच राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने आधिकारिक तौर पर पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। उनके साथ छह अन्य राज्यसभा सांसदों ने भी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने का ऐलान किया।
इस घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि आखिर राघव चड्ढा और उनके साथियों पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) क्यों लागू नहीं हुआ।
‘दो-तिहाई’ नियम ने दिलाई कानूनी राहत
भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, यदि कोई सांसद व्यक्तिगत रूप से पार्टी छोड़ता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। लेकिन, अगर किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सांसद या विधायक एक साथ दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो इसे “मर्जर” माना जाता है और ऐसे में दलबदल कानून लागू नहीं होता।
AAP के राज्यसभा में कुल 10 सदस्य थे, जिनमें से 7 सांसदों ने एक साथ भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। इस तरह यह संख्या दो-तिहाई के आंकड़े को पार कर गई, जिससे यह कदम तकनीकी रूप से “विलय” की श्रेणी में आ गया और सदस्यों की सदस्यता सुरक्षित रही।
AAP ने क्यों नहीं किया निष्कासन?
सूत्रों के मुताबिक, Arvind Kejriwal के नेतृत्व वाली AAP ने राघव चड्ढा को पहले से निष्कासित नहीं किया। इसकी एक वजह यह मानी जा रही है कि यदि किसी सांसद को पार्टी से निकाला जाता है, तो वह सदन में अपनी सदस्यता बनाए रख सकता है।
हालांकि, चड्ढा और उनके समर्थकों ने पर्याप्त संख्या जुटाकर सीधे विलय का रास्ता अपनाया, जिससे कानूनी जटिलताओं से बचा जा सका।
पंजाब की राजनीति पर बड़ा असर
इस घटनाक्रम का सबसे अधिक असर पंजाब की राजनीति पर देखने को मिल सकता है। पार्टी छोड़ने वाले 7 सांसदों में से 6 पंजाब से हैं, जो 2022 के चुनावों के बाद राज्यसभा पहुंचे थे। अब पंजाब से AAP के पास केवल एक सांसद बचा है।
किन सांसदों ने छोड़ी पार्टी
AAP छोड़ने वाले नेताओं में राघव चड्ढा के अलावा Sandeep Pathak, Ashok Kumar Mittal, Swati Maliwal, Harbhajan Singh, Vikram Sahney और Rajendra Gupta शामिल बताए जा रहे हैं।
चड्ढा का बयान
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने जिस पार्टी को वर्षों तक खड़ा करने में योगदान दिया, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब जनहित के बजाय निजी हितों पर केंद्रित हो गई है।
हालिया घटनाक्रम में यह भी उल्लेखनीय है कि चड्ढा को कुछ समय पहले ही राज्यसभा में AAP के डिप्टी लीडर पद से हटाया गया था, जिसके बाद से पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे थे।