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दिल्ली

राहुल गांधी के ‘माल’ और ‘कबाब’ बयान पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं—सड़ी हुई सोच उजागर

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नई दिल्ली। संसद परिसर में एपस्टीन फाइल्स का मुद्दा उठाने के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। उनके बयान पर भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने राहुल गांधी की भाषा और शब्द चयन पर सवाल उठाते हुए उनकी सोच को “सड़ी हुई और भ्रष्ट” करार दिया।

एएनआई से बातचीत में कंगना रनौत ने कहा कि एपस्टीन फाइल्स को लेकर राहुल गांधी द्वारा ‘माल’ और ‘कबाब’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने कहा, “उनके शब्दों की पसंद ही उनकी मानसिकता को उजागर करती है। सार्वजनिक जीवन में बैठे व्यक्ति से जिम्मेदारी और मर्यादा की उम्मीद की जाती है, लेकिन राहुल गांधी बार-बार ऐसे बयान देते हैं, जो राजनीति के स्तर को गिराते हैं।”

कंगना ने आगे कहा कि संसद जैसे गरिमामय मंच पर नेताओं को बेहद संयमित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। उनका आरोप था कि राहुल गांधी की टिप्पणियां न केवल असंवेदनशील हैं, बल्कि राजनीतिक विमर्श को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

कांग्रेस का पलटवार—राहुल को बोलने से रोका जा रहा

इधर, कांग्रेस पार्टी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि लोकसभा में राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पिछले तीन दिनों से नेता प्रतिपक्ष अपना भाषण पूरा नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को इसलिए रोका जा रहा है क्योंकि वे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम और संवेदनशील मुद्दे उठा रहे हैं।

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि जब राहुल गांधी सवाल पूछते हैं तो उन्हें बोलने नहीं दिया जाता, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है। कांग्रेस का कहना है कि यह विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश है।

चीन घुसपैठ और पूर्व सेना प्रमुख की किताब का हवाला

कांग्रेस नेताओं ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की किताब का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा का कहना है कि चीनी घुसपैठ के नाजुक दौर में सरकार ने राजनीतिक जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर दिए और सेना को अकेला छोड़ दिया।

कांग्रेस का आरोप है कि जब इन गंभीर मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाता है, तो संसद में राहुल गांधी को बोलने से रोका जाता है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को तेज कर दिया है।

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