रांची: किसी भी संभावित रेल दुर्घटना के दौरान आपात स्थिति से निपटने और राहत कार्य को गति देने के लिए रेलवे ने एक बड़ी पहल की है। जिन क्षेत्रों में रेलमार्ग के जरिए रिलीफ ट्रेन को पहुंचने में अधिक समय लगता है, वहां अब रेलवे की रिस्टोरेशन टीम सड़क मार्ग से जल्द से जल्द पहुंचेगी। दक्षिण पूर्व रेलवे के अंतर्गत रांची रेलमंडल को पहला 'रोड मोबाइल रिस्टोरेशन वाहन' (RMARV) प्रदान किया गया है, जिसे हटिया स्टेशन के पास तैनात किया गया है।
हटिया यार्ड में तैनात रहेगी विशेष वैन यह नई रोड मोबाइल रिलीफ वैन हटिया स्टेशन के पास स्थित यार्ड और रेलवे कॉलोनी के निकट तैनात की गई है। इस स्थान से सूचना मिलते ही सुरक्षाबलों, तकनीकी कर्मचारियों और रिलीफ टीम को तुरंत रवाना करना बेहद आसान होगा। इससे जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने और बाधित रेल मार्ग को जल्द से जल्द बहाल करने में मदद मिलेगी।
सड़क मार्ग का क्यों चुना गया विकल्प? रांची रेलमंडल में कई ऐसे भौगोलिक क्षेत्र हैं, जहां सड़क मार्ग से पहुंचना रेलमार्ग की तुलना में काफी सुगम और कम समय लेने वाला है। ऐसी स्थितियों में केवल ट्रेन पर निर्भर रहने से राहत कार्य में देरी की आशंका बनी रहती थी। इसी समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए सड़क मार्ग से संचालित होने वाली इस वैन को बेड़े में शामिल किया गया है।
आधुनिक रेस्क्यू और कटिंग उपकरणों से लैस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए इस वैन में कई अत्याधुनिक उपकरण मौजूद हैं:
कटिंग और रेस्क्यू उपकरण: डिब्बों को काटने और फंसे लोगों को निकालने के लिए।
हाइड्रोलिक और रीरैलिंग उपकरण: पटरी से उतरे डिब्बों को उठाने और दोबारा ट्रैक पर लाने के लिए।
ट्रैक और इलेक्ट्रिकल टूल: ट्रैक मरम्मत, बिजली आपूर्ति और रोशनी की व्यवस्था के लिए।
संचार और सुरक्षा उपकरण: त्वरित संदेश सेवा और टीम की सुरक्षा के लिए।
अन्य मंडलों में भी चल रही है तैयारी रांची के अलावा भारतीय रेलवे के अन्य मंडलों में भी इस व्यवस्था को लागू किया जा रहा है:
सिकंदराबाद मंडल: नई RMARV गाड़ी खरीदने की प्रक्रिया जारी है।
प्रयागराज मंडल: 'तेजस' नाम से रोड मोबाइल रिलीफ वैन विकसित की गई है।
कोटा व भावनगर मंडल: श्यामगढ़ और जेतलसर जंक्शन पर वैन तैनात की जा चुकी हैं।
अन्य मंडल: मुंबई-भुसावल, नागपुर-पुणे, सोलापुर और बेंगलुरु मंडलों में भी वैन विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।