वित्त वर्ष 2026 के आखिरी कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex करीब 1200 अंकों तक टूट गया, जबकि Nifty 50 भी फिसलकर 22475 के नीचे पहुंच गया। बाजार खुलते ही निवेशकों की संपत्ति में लगभग ₹7 लाख करोड़ की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
सुबह 9:25 बजे के आसपास सेंसेक्स 997.99 अंक (1.36%) गिरकर 72,585.23 पर और निफ्टी 284.25 अंक (1.25%) टूटकर 22,535.35 पर कारोबार करता दिखा। इंट्रा-डे में गिरावट और गहरी रही—सेंसेक्स 1,191 अंकों तक लुढ़का, जबकि निफ्टी 22,470 के स्तर तक आ गया।
सेक्टर का हाल
बाजार में व्यापक बिकवाली के चलते ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में रहे। खासकर आईटी, फार्मा, PSU बैंक, प्राइवेट बैंक और FMCG सेक्टर में भारी दबाव देखने को मिला। हालांकि ऑयल एंड गैस और मेटल सेक्टर में सीमित खरीदारी का रुझान नजर आया।
बाजार गिरने की 7 बड़ी वजहें
डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी का दबाव
वित्त वर्ष के आखिरी दिन बड़ी संख्या में एक्सपायरी होने से बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया।
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव
भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिससे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ा।
वैश्विक बाजारों में गिरावट
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिकवाली का असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
क्रूड ऑयल महंगा होने से महंगाई और अर्थव्यवस्था पर दबाव की आशंका बढ़ी।
India VIX में उछाल
वोलैटिलिटी इंडेक्स के बढ़ने से बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल बना।
रुपये की कमजोरी
डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से विदेशी निवेश पर असर पड़ा।
विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली
FII की लगातार बिकवाली ने बाजार की गिरावट को और तेज कर दिया।
वैश्विक और घरेलू दोनों कारकों के दबाव में बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कुछ सेक्टरों में सीमित खरीदारी संकेत देती है कि निवेशक अभी भी अवसर तलाश रहे हैं, लेकिन फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है।