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बिजनेस

RBI के सख्त कदम से रुपये में जोरदार रिकवरी, डॉलर के मुकाबले 1.22 पैसे की मजबूती

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भारतीय मुद्रा बाजार में सोमवार (30 मार्च) को बड़ी हलचल देखने को मिली, जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के नए निर्देशों के बाद रुपये में तेज़ रिकवरी दर्ज की गई। डॉलर के मुकाबले रुपया 1.22 पैसे मजबूत होकर 93.59 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जबकि शुक्रवार (27 मार्च) को यह 94.81 पर बंद हुआ था।

RBI के निर्देश का असर

RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे हर कारोबारी दिन के अंत तक अपनी नेट ओपन डॉलर-रुपया पोजीशन को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखें। यह नियम 10 अप्रैल तक लागू रहेगा। इस फैसले का मकसद रुपये पर बढ़ते दबाव को कम करना और बाजार में स्थिरता लाना है।

क्यों मजबूत हुआ रुपया?

RBI के इस कदम के बाद बैंकों ने अपने आर्बिट्राज पोजीशन को तेजी से कम करना शुरू कर दिया, जिससे घरेलू बाजार में डॉलर की बिक्री बढ़ी और रुपये को मजबूती मिली।

आर्बिट्राज ट्रेड के तहत बैंक ऑनशोर मार्केट में डॉलर खरीदकर उसे NDF (नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड) मार्केट में बेचते थे, जिससे दोनों बाजारों के बीच बढ़ते स्प्रेड का फायदा उठाया जाता था। अनुमान है कि इस तरह की पोजीशन का आकार 25 से 50 बिलियन डॉलर तक हो सकता है।

रुपये पर पहले क्यों था दबाव?

मार्च महीने में रुपये पर भारी दबाव देखा गया। यह महीने के अंत तक 4% से अधिक कमजोर हो चुका था, जो पिछले सात सालों का सबसे खराब मासिक प्रदर्शन माना जा रहा है। शुक्रवार को ही रुपया करीब 1% गिरकर 94.8125 के स्तर पर पहुंच गया था, जो इसके ऑल-टाइम लो 94.84 के करीब था।

इस गिरावट के पीछे प्रमुख वजहें थीं:

  • वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता
  • तेल की कीमतों में उछाल
  • भू-राजनीतिक तनाव (ईरान से जुड़ी स्थिति)
  • निवेशकों का जोखिम से बचाव (Risk-off sentiment)

बाजार में आगे क्या?

RBI लगातार ऑनशोर और NDF दोनों मार्केट में सक्रिय रहकर रुपये को सपोर्ट कर रहा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पोजीशन अनवाइंडिंग के दौरान बैंकों को नुकसान भी उठाना पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें पहले के मुकाबले बड़े स्प्रेड पर सौदे बंद करने पड़ रहे हैं।

एक प्राइवेट बैंक के करेंसी ट्रेडर के मुताबिक, “डॉलर/रुपये में किसी भी गिरावट पर इंपोर्टर्स की मांग बढ़ सकती है, जबकि बैंक अपनी पोजीशन कम करते रहेंगे—ऐसे में आगे की दिशा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।”

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