लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिला आरक्षण के बहाने “नारी को नारा बनाने” की कोशिश कर रही है।
महिला आरक्षण पर सपा का रुख
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में है, लेकिन उन्होंने इसे “भाजपाई चालबाजी” करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा जिस महिला सम्मान की बात कर रही है, उसके अपने संगठन में महिलाओं की भागीदारी कितनी है।
जनगणना और आरक्षण को लेकर सवाल
सपा प्रमुख ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह जाति जनगणना और सामान्य जनगणना को टाल रही है। उनके अनुसार, ऐसा कर भाजपा आरक्षण की प्रक्रिया को भी प्रभावित करना चाहती है। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण में पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया जाए।
महंगाई और महिलाओं की स्थिति पर निशाना
कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने महंगाई के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा की “कमीशनखोरी और चंदा वसूली” के कारण महंगाई बढ़ी है, जिससे महिलाओं की रसोई पर असर पड़ा है। बढ़ती गैस सिलेंडर कीमतों और कमी को भी उन्होंने गंभीर मुद्दा बताया।
मजदूरों और महिलाओं के प्रदर्शन का जिक्र
उन्होंने NCR और अन्य क्षेत्रों में वेतन वृद्धि को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि सरकार का यह विधेयक इतना प्रभावी है, तो उसे इन मजदूरों और महिलाओं के बीच जाकर इसकी घोषणा करनी चाहिए।
परिसीमन पर भी जताई आशंका
अखिलेश यादव ने परिसीमन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 600 की जा रही है, तो इसमें किसी प्रकार की साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा हुआ तो भाजपा को उत्तर भारत में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
महिला आरक्षण के स्वरूप पर आपत्ति
सपा प्रमुख ने सीटों को सीधे आरक्षित करने के बजाय पार्टी आधारित महिला आरक्षण की वकालत की। साथ ही उन्होंने चक्रीय आधार (रोटेशन) पर आरक्षण का विरोध करते हुए कहा कि इससे जनप्रतिनिधियों का अपने क्षेत्र से भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हो सकता है।