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राज्य

बदरीनाथ चढ़ावा चोरी मामला: CCTV में कई बार कैद हुई चोरी, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई; गिरफ्तारी का इंतजार

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देहरादून/बदरीनाथ: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की चोरी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जांच में सामने आया है कि आरोपी कर्मचारी कई बार मंदिर के गणना कक्ष से दान की राशि और सामान बाहर ले जाता हुआ सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ, लेकिन इसके बावजूद न तो समय रहते किसी अधिकारी ने उसे रोका और न ही उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई। मामले में पुलिस केस दर्ज होने के बावजूद अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।

जांच रिपोर्ट में सिस्टम पर उठे सवाल

बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) की जांच समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, निजी सचिव संवर्ग का एक कर्मचारी कई बार गणना कक्ष से दान का सामान बाहर ले गया। पूरी घटना सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट दिखाई दे रही है। इसके बावजूद समिति के किसी कर्मचारी या अधिकारी ने इस पर आपत्ति नहीं जताई और न ही किसी प्रकार की शिकायत दर्ज कराई।

रिपोर्ट ने बीकेटीसी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यदि दान की चोरी लगातार होती रही, तो सीसीटीवी फुटेज की नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई और जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की।

बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि जांच रिपोर्ट औपचारिक रूप से मिलने के बाद सभी तथ्यों का अध्ययन किया जाएगा। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं

मामले में पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बावजूद आरोपी कर्मचारी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इतना ही नहीं, आरोप है कि जांच समितियों ने आरोपी से औपचारिक पूछताछ तक नहीं की, जबकि सीसीटीवी फुटेज में उसकी गतिविधियां स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। इसे लेकर जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

महेंद्र भट्ट के बयान से बढ़ा विवाद

मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ब्राह्मण, पुजारी और पंडा कभी मंदिर में चोरी नहीं करते। उन्होंने मंदिर में दान की गणना करने वाले लोगों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते की व्यवस्था के प्रस्ताव पर भी सवाल उठाया।

महेंद्र भट्ट ने कहा कि पुजारियों और पंडों को श्रद्धालुओं से दक्षिणा प्राप्त होती है और उन पर यजमानों का विश्वास बना रहता है। ऐसे में उनके लिए बिना जेब वाले कुर्ते का नियम उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि चोरी संस्था के कर्मचारियों द्वारा की गई है तो उनके लिए अलग नियम बनाए जा सकते हैं।

कांग्रेस का पलटवार

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चोरी और डकैती जैसे अपराधों का कोई धर्म या जाति नहीं होती और अपराध को किसी समुदाय से जोड़ना उचित नहीं है।

गोदियाल ने कहा कि कानून को बिना किसी भेदभाव के अपना काम करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि चढ़ावा चोरी के दोषी कर्मचारियों के खिलाफ स्पष्ट और सख्त नीति बनाई जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि सरकार भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर है तो जवाबदेह पदों पर बैठे लोगों के लिए भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले नियम लागू किए जाने चाहिए।

देवस्थानम बोर्ड पर भी शुरू हुई सियासत

इस बीच, चारधाम देवस्थानम बोर्ड को दोबारा लागू करने संबंधी पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बयान का भी विरोध शुरू हो गया है। देवप्रयाग में जिला कांग्रेस और नगर कांग्रेस कमेटी ने उनके बयान के विरोध में प्रदर्शन कर पुतला दहन किया।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि देवस्थानम बोर्ड तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के अधिकारों के खिलाफ है। उनका दावा है कि वर्ष 2021 में व्यापक विरोध के बाद राज्य सरकार को देवस्थानम अधिनियम वापस लेना पड़ा था और इसे दोबारा लागू करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

फिलहाल चढ़ावा चोरी मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट और आरोपी की गिरफ्तारी का इंतजार है। रिपोर्ट के आधार पर बीकेटीसी और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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