रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यात्रा मार्ग पर मौजूद यात्रियों और वाहनों को विभिन्न सुरक्षित स्थानों एवं होल्डिंग क्षेत्रों में ठहराया गया है।
प्रशासन के अनुसार जनपद रुद्रप्रयाग के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है। मौसम विभाग ने आगामी घंटों में भारी बारिश, तेज हवाएं और तूफान की संभावना जताई है। ऐसे में किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए केदारनाथ धाम की ओर बढ़ रहे श्रद्धालुओं को विभिन्न पड़ावों पर रोक दिया गया है।
पैदल यात्रियों को भी सुरक्षित स्थानों पर रोका गया
केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर मौजूद श्रद्धालुओं को निकटतम सुरक्षित स्थलों और निर्धारित होल्डिंग एरिया में ठहराया गया है। वहीं श्रीनगर क्षेत्र में केदारनाथ धाम की ओर जाने वाले वाहनों की आवाजाही भी फिलहाल बंद कर दी गई है। वाहनों को निर्धारित होल्डिंग क्षेत्रों में रोका जा रहा है ताकि मौसम सामान्य होने तक यात्रा सुरक्षित बनी रहे।
मौसम सामान्य होने के बाद ही मिलेगी अनुमति
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मौसम में सुधार और यात्रा मार्ग की स्थिति पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के बाद ही श्रद्धालुओं और वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी। जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
श्रद्धालुओं से दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील
अधिकारियों ने श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने, अनावश्यक यात्रा से बचने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
अप्रैल में शुरू हुई थी चारधाम यात्रा
गौरतलब है कि चारधाम यात्रा की शुरुआत अक्षय तृतीया के अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। यात्रा शुरू होने के बाद से केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
लगातार खराब मौसम के बीच प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ यात्रा प्रबंधन में जुटा हुआ है, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचाव किया जा सके।