उज्जैन, 2 सितंबर: मध्य प्रदेश में करीब ₹2,600 करोड़ की लागत से तैयार किए जा रहे उज्जैन-गरौठ हाईवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हाईवे का एक हिस्सा निर्माण के महज सात महीने के भीतर दूसरी बार धंस गया है। सड़क धंसने की घटना सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने संबंधित हिस्से को तोड़कर नए सिरे से बनाने का फैसला किया है।
जानकारी के मुताबिक, हाईवे के करीब 500 मीटर हिस्से में तकनीकी खामियां सामने आई हैं। सड़क के बार-बार धंसने को देखते हुए NHAI ने इस हिस्से को हटाकर दोबारा निर्माण कार्य शुरू कराया है। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण में सामने आई तकनीकी कमियों को दूर करते हुए सड़क को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।
सात महीने में दूसरी बार धंसी सड़क
उज्जैन-गरौठ हाईवे पर सड़क धंसने की यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले भी इसी हिस्से में सड़क के क्षतिग्रस्त होने की समस्या सामने आ चुकी है। करीब सात महीने के भीतर दूसरी बार सड़क धंसने से निर्माण की गुणवत्ता और सड़क की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर भी सड़क के बार-बार खराब होने को लेकर चिंता जताई जा रही है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यदि निर्माण के शुरुआती महीनों में ही इस तरह की समस्या सामने आती है, तो भविष्य में सड़क की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े होते हैं।
500 मीटर सड़क तोड़कर दोबारा बनाई जाएगी
सड़क की तकनीकी स्थिति की जांच के बाद NHAI ने प्रभावित करीब 500 मीटर हिस्से को तोड़कर नए सिरे से बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत खराब हिस्से को हटाकर जरूरी सुधार कार्य किए जा रहे हैं और उसके बाद सड़क का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
NHAI की ओर से दावा किया गया है कि पुनर्निर्माण का काम 31 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरान निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि सड़क दोबारा धंसने जैसी समस्या न आए।
₹2,600 करोड़ की लागत से बन रहा हाईवे
उज्जैन-गरौठ हाईवे मध्य प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है। करीब ₹2,600 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना का उद्देश्य उज्जैन और गरौठ के बीच सड़क संपर्क को बेहतर करना और क्षेत्र में आवागमन को सुगम बनाना है।
हालांकि, परियोजना के एक हिस्से में बार-बार सड़क धंसने की घटना ने निर्माण एजेंसी और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि दोबारा बनाया जा रहा 500 मीटर हिस्सा निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर कितना खरा उतरता है।
अब निगाहें जांच और पुनर्निर्माण पर
सड़क के दोबारा धंसने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर निर्माण में ऐसी कौन-सी तकनीकी कमी रह गई, जिसके कारण सड़क इतने कम समय में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हुई। NHAI द्वारा प्रभावित हिस्से को नए सिरे से बनाए जाने के बाद यह देखना अहम होगा कि सुधार के बाद सड़क की गुणवत्ता और टिकाऊपन में कितना सुधार आता है।